Menu

आजादी के बाद भारत ने आर्थिक मोर्चे पर कई बार उतार-चदाव देखा है। शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए तत्कालीन सरकारों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आज भी कोरोना महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। तमाम बाधाओं और चुनौतियों का डटकर मुक़ाबला करने के कारण आज भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है.

भारत जब आजाद हुआ था, तब भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2.7 लाख करोड़ रूपये की थी, जो वित्त वर्ष 2020-21 में बढ़कर 135.13 लाख करोड़ रूपये हो गई। वर्ष 1951 में पहली  पंचवर्षीय योजना शुरू हुई थी, लेकिन अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में यह बहुत सफल नहीं रही। हालाँकि, वर्ष 1961 से भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि दृष्टिगोचर होने लगी। वर्ष 1950 से वर्ष 1979 तक देश की जीडीपी औसतन 3.5 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही थी, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था में “हिंदू वृद्धि दर” कहा गया, जबकि वर्ष 1950 से वर्ष 2020 तक भारत की जीडीपी वृद्धि दर औसतन 6.15 प्रतिशत रही. वर्ष 2010 की पहली तिमाही में जीडीपी दर 11.40 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई थी, जबकि वर्ष 1979 की चौथी तिमाही में इसने 5.20 की सबसे कम वृद्धि दर्ज की थी.

वर्ष 1960 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 81.3 अमेरिकी डॉलर थी, जो अप्रैल 2021 में बढ़कर 7332.9 अमेरिकी डॉलर हो गई. देश में प्रति व्यक्ति आय की वार्षिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 1980-81 से वित्त वर्ष 1991-92 के दौरान औसतन 3.1 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 1992-93 से वित्त वर्ष 2002-03 के दौरान बढ़कर औसतन 3.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई, जो पुनः वित्त वर्ष 2003-2004 से वित्त वर्ष 2007-2008 के दौरान दोगुनी होकर औसतन 7.2 प्रति वर्ष के स्तर पर पहुँच गई.

नेशनल रियल स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारडेको) द्वारा हाल में कराये गए एक सर्वेक्षण के अनुसार देश का रियल सेक्टर वर्ष 2025 तक 650 अरब डॉलर के स्तर तक पहुँच जायेगा और वर्ष 2028 तक इसका आकार बढ़कर 850 अरब डॉलर, जबकि वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। देश की जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान वित्त वर्ष 2007-2008 में 9.4 प्रतिशत रहा, जबकि आधारभूत संरचना क्षेत्र का 9.6 प्रतिशत, वित्त, स्थावर संपदा, आवास क्षेत्र का 11.7 प्रतिशत और व्यापार और होटल क्षेत्र का 12.1 प्रतिशत  रहा, जिसमें आगामी सालों में कमोबेश उत्तरोत्तर सुधार होता चला गया।

वर्ष 1980 का दशक युवाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इस दशक में सरकार ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए कई कदम उठाये, जिससे आगामी वर्षों में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। आज सूचना एवं प्रौद्योगिकी की मदद से कई फिनटेक कंपनियाँ अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम कर रही हैं।

पहली बार, वर्ष वित्त वर्ष 1989-90 में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) सूचकांक 1000 के अंक के स्तर को पार कर गया। वित्त वर्ष 1992-93 में हर्षद मेहता द्वारा किये गए घोटाले की वजह से शेयर बाजार की साख पर प्रतिकूल असर पड़ा, लेकिन जल्द ही शेयर बाजार इस झटके से उबर गया। वर्ष 2006 में शेयर बाजार का सूचकांक 10000 अंक के स्तर को पार कर गया. फिर वित्त वर्ष 2014-15 में शेयर बाजार का सूचकांक 30000 अंक के स्तर को और वित्त वर्ष 2018-19 में 40000 अंक के स्तर को पार कर गया, जो वर्ष 2021 में रिकॉर्ड 55000 अंक के स्तर को पार किया।

15 अगस्त 2021 को हमारे देश ने 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया, जिसे अमृत महोत्सव का नाम दिया गया। लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए भारत ने कई उपाय किए हैं, जिसमें स्वदेशी टीका को विकसित करना सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भी भारत में चलाया जा रहा है। देश के वैज्ञानिकों और उद्यमियों के कारण इस विकत संकट के समय में भी भारत कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने वाले संसाधनों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं है। टीकाकरण अभियान में तेजी आने से देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों फिर से शुरू हो गई है और उसमें निरंतर मजबूती आ रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में रोजगार सृजन के लिए सरकार 100 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा की योजना का आगाज जल्द करेगी, ताकि युवाओं को आत्मनिर्भर और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अमलीजामा पहनाना सरकार द्वारा उठाया गया एक एतिहासिक फैसला था। इससे कर चोरी को रोकने में सरकार को बड़ी सफलता मिली है। सरकार के इस पहल से धीरे-धीरे जीएसटी संग्रह में तेजी आ रही है। जून महीने में ईवे बिल की कुल मात्रा में मासिक आधार पर 37.1 प्रतिशत का उछाल आया, जबकि सालाना आधार पर इसमें 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। आर्थिक क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों का ही नतीजा है कि वित्त वर्ष 2021 के पहले दो महीनों में केंद्र सरकार का कर संग्रह संतोषजनक रहा। अप्रत्यक्ष कर संग्रह में तेजी आने के कारण वित्त वर्ष 2021 में कुल कर संग्रह 20.16 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 20.05 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा। गौरतलब है कि प्रत्यक्ष कर संग्रह में 10 प्रतिशत कमी आने के बाद भी कुल कर संग्रह अधिक रहा। अप्रत्यक्ष कर में जीएसटी, उत्पाद शुल्क एवं सीमा शुल्क आते हैं। वित्त वर्ष 2021 में सीमा शुल्क के रूप में 1.32 लाख करोड़ रुपये वसूले गए, जो पिछले वित्त वर्ष के 1.09 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 21 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर (बकाये) से होने वाला संग्रह भी आलोच्य अवधि के दौरान 58 प्रतिशत बढ़कर 3.91 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि जनसंख्या बढ़ने से किसानों की जमीन का रकबा निरंतर कम हो रहा है। आज लगभग 80 प्रतिशत किसानों के पास 2 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। इसलिए, छोटे किसानों की बेहतरी के लिए इस वास्तविकता के अनुरूप सरकार नीतियाँ बना रही है, जिससे किसानों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और किसान का बेटा किसान बनना चाहेगा। ऐसा करना सरकार के लिए बहुत ही जरूरी है, क्योंकि कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान कम हो रहा है, जबकि कोरोना काल में अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में यह क्षेत्र अपनी महत्ती भूमिका निभा रहा था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज 8 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़कर कई तरह के उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इन्हें देश एवं विदेश में बड़ा बाजार मिल सके के लिए सरकार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तैयार करेगी। जम्मू एवं कश्मीर में विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। देश में समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रदेशों का विकास करना अत्यावश्यक भी है। इसलिए, जम्मू कश्मीर में डी-लिमिटेशन कमीशन का गठन किया गया है और जल्द ही वहाँ विधानसभा चुनाव कराया जायेगा, ताकि लोकतंत्र के साये में विकास को पंख लगे सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज सरकारी योजनाओं को मूर्त रूप देने की गति बढ़ी है और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है। कोरोना महामारी में स्वास्थ्य क्षेत्र की महत्ता को समझते हुए सरकार ने डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मेडिकल सीटों में भी बढ़ोतरी की है। रोगों के रोकथाम पर भी अब सरकार ध्यान दे रही है। जरूरत के अनुसार अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाये गए हैं। यह प्राथमिकता के आधार पर किया जाने वाला कार्य था,  क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र के कमजोर रहने की वजह से ही देश की अर्थव्यवस्था को ज्यादा नुकसान हुआ है।

देश में आवागमन की अवसंरचना को मजबूत करने के लिए आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर 75 सप्ताह में, 75 वंदे भारत ट्रेनों से देश के हर कोने को जोड़ा जायेगा। विमानन क्षेत्र में भी सरकार अवसंरचना को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है और देश के दूर-दराज के इलाकों को देश के हवाई नक्शे में शामिल करने का काम भी किया जा रहा है।

आजादी के 75 सालों में देश ने आर्थिक मोर्चे पर अनेक उपलब्धियां हासिल की है। भारत की अर्थव्यवस्था के आकार में और प्रति व्यक्ति आय में कई गुना इजाफा हुआ है। मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन की बनाना चाहती है, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इस संकल्पना को पूरा करना फिलवक्त संभव नहीं है। इस संकट की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार भी कम हुआ है और वर्ष 2021 में देश में प्रति व्यक्ति आय 5.4 प्रतिशत कम होकर औसतन 1.43 लाख रूपये रहने का अनुमान है। बावजूद इसके, यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत जल्द ही अर्थव्यवस्था की राह में आए गतिरोधों को खत्म करने में सफल रहेगा और दुनिया की पाँचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में भी कामयाब होगा।

(लेखक वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र, मुंबई के आर्थिक अनुसधान विभाग में सहायक महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। प्रस्तुत विचार उनके निजी हैं।)

छवि स्रोत: https://spiderimg.amarujala.com