PM’s address at public meeting at Solang Valley in Himachal Pradesh


  • मां हिडम्‍बा की, ऋषि-मुनियों की तपस्‍थली जहां 18 करड़ू यानी गांव-गांव देवताओं की जीवंत और अनूठी परम्‍परा है, ऐसी दिव्‍य धरा को मैं प्रणाम करता हूं, नमन करता हूं।
  • और कंचननाग की ये भूमि, अभी जयराम जी हमारे मुख्‍यमंत्री जी वर्णन कर रहे थे पैराग्‍लाइडिंग के मेरे इस शौक का। अच्‍छा तो लगता था उड़ने का लेकिन जब पूरी किट उठा करके ऊपर तक जाना पड़ता था तो दम उखड़ जाता था।
  • और एक बार शायद दुनिया में और किसी ने किया होगा कि नहीं मुझे मालूम नहीं। अटलजी मनाली आए थे, मैं यहां संगठन की व्‍यवस्‍था वाला व्‍यक्ति था तो थोड़ा पहले आया था। तो हमने एक कार्यक्रम बनाया।
  • 11 पैराग्‍लाइडर्स, पायलट्स एक साथ मनाली के आसमान में, और जब अटलजी पहुंचे तो सबने पुष्‍प वर्षा की थी। शायद दुनिया में पैराग्‍लाइडिंग का ऐसा उपयोग पहले कभी नहीं हुआ होगा। लेकिन जब शाम को मैं अटलजी से मिलने गया तो कह रहे, भाई बहुत साहस कर रहे हो, ऐसा क्‍यों करते हो।
  • लेकिन वो दिन मेरे मनाली के जीवन में भी एक बड़ा सही अवसर बन गया था कि पैराग्‍लाइडिंग से पुष्‍प वर्षा करके वाजपेयी जी के स्‍वागत करने की कल्‍पना बहुत ही रोचक थी।
  • हिमाचल के मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों आप सभी को अटल टनल लोकार्पण की भी आज बहुत-बहुत बधाई है। और जैसा मैंने पहले कहा ये जगह भले ही आज सभा हो रही हो और मैं तो देख रहा हूं सोशल डिस्‍टेंसिंग का परफेक्‍ट प्‍लानिंग हुआ है।
  • दूर-दूर तक सब बराबर सोशल डिस्‍टेंसिंग करके और अपना हाथ भी उठा करके मुझे आज उन सबका भी अभिवादन करने का अवसर मिला है। ये जगह मेरी जानी-पहचानी जगह है।
  • वैसे मैं एक जगह पर ज्‍यादा समय रुकने वाला व्‍यक्ति नहीं होता था बहुत तेजी से दौरा करता था। लेकिन जब अटलजी आते थे तो जितने दिन रुकते थे, मैं भी रुक जाता था, तो मुझे भी यहां काफी निकटता का अनुभव आप सबसे होता था।
  • अब, तब उनके साथ तब उनके साथ मनाली के, हिमाचल के विकास को लेकर कई बार चर्चा होती थी। साथियों, मनाली को बहुत अधिक पसंद करने वाले अटल जी की ये अटल इच्छा थी, कि यहां स्थितियां बदलें, यहां की कनेक्टिविटी बेहतर हो।
  • इसी सोच के साथ उन्होंने रोहतांग में टनल बनाने का फैसला लिया था। मुझे खुशी है कि आज अटल जी का ये संकल्प सिद्ध हो गया है।
  • ये अटल टनल अपने ऊपर भले ही इतने बड़े पहाड़ का (यानी करीब 2 किलोमीटर ऊंचा पहाड़ उस टनल के ऊपर है) बोझ उठाए है। जो बोझ कभी लाहौल-स्‍पीति और मनाली के लोग अपने कंधे पर उठाते थे, इतना बड़ा बोझ आज उस टनल ने उठाया है और उस टनल ने यहां के नागरिकों को एक प्रकार से बोझ मुक्‍त कर दिया है।
  • सामान्य लोगों का एक बड़ा बोझ कम होना, उनका लाहौल-स्पीति आना जाना बहुत आसान होना अपने आप में संतोष की, गौरव की, आनंद की बात है।

 

  • अब वो दिन भी दूर नहीं जब टूरिस्ट कुल्लू-मनाली से सिड्डु घी का नाश्ता करके निकलेंगे और लाहौल में जाकर ‘दू-मार’ और ‘चिलड़े’ का लंच कर पाएंगे। ये पहले संभव नहीं था।
  • ठीक है, कोरोना है, लेकिन अब धीरे-धीरे देश अनलॉक भी तो हो रहा है।मुझे उम्मीद है, अब देश के अन्य सेक्टरों की तरह टूरिज्म भी धीरे-धीरे गति पकड़ लेगा और बड़े शान से कुल्‍लू का दशहरा की तैयारी तो चलती ही चलती होगी।
  • साथियों, अटल टनल के साथ-साथ हिमाचल के लोगों के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है। हमीरपुर में 66 मेगावॉट के धौलासिद्ध हाइड्रो प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी गई है। इस प्रोजेक्ट से देश को बिजली तो मिलेगी ही, हिमाचल के अनेकों युवाओं को रोज़गार भी मिलेगा।
  • साथियों, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का जो अभियान पूरे देश में चल रहा है, उसमें बहुत बड़ी भागीदारी हिमाचल प्रदेश की भी है।
  • हिमाचल में ग्रामीण सड़कें हों, हाईवे हों, पावर प्रोजेक्ट्स हों, रेल कनेक्टिविटी हो, हवाई कनेक्टिविटी हो, इसके लिए अनेक परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।
  • चाहे कीरतपुर-कुल्लू-मनाली रोड कॉरिडोर हो, जीरकपुर-परवानु-सोलन-कैथलीघाट कॉरिडोर हो, नांगलडैम-तलवाड़ा रेल रूट हो, भानूपल्ली-बिलासपुर बेरी रेल रूट हो, सभी पर तेज गति से काम जारी है। प्रयास यही है कि ये प्रोजेक्ट्स जल्द से जल्द पूरे होकर हिमाचल के लोगों की सेवा करना शुरू करें।

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