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बीते 15 अगस्‍त को देश ने ना केवल अपना स्‍वतंत्रता दिवस मनाया बल्कि सुनहरी स्‍वाधीनता के अमृत महोत्‍सव में भी प्रवेश किया। हमारा भारतवर्ष अब आजादी के 75 वर्ष का वृहद उत्‍सव मना रहा है। यह महोत्‍सव आगामी वर्ष 15 अगस्‍त तक जारी रहेगा और तब देश को आजाद हुए 75 वर्ष पूरे हो जाएंगे। निश्चित ही यह महोत्‍सव इंगित करता है उस प्रतिज्ञा को जो समूचे राष्‍ट्र ने एकजुट होकर पराधीनता के प्रतिकार के लिए ली थी। हर देश की विकास यात्रा में एक समय ऐसा आता है जब वह राष्ट्र खुद को एक नए सिरे से परिभाषित करता है, जब वह नए संकल्पों के साथ खुद को आगे ले जाता है। भारत की विकास यात्रा में आज वह समय आ गया है। आज सरकारी योजनाओं ने गति पकड़ी है और अपने लक्ष्य तक पहुंच रही है। 21वीं सदी में इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए भारत की क्षमताओं का पूरी तरह से उपयोग करना आवश्यक है। इसके लिए हमें उस वर्ग का हाथ थामना होगा जो पिछड़ रहा है, जो क्षेत्र पिछड़ रहा है। हमारा विकास समावेशी होना चाहिए। पूर्वोत्तर क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख सहित हिमालयी क्षेत्र, तटीय क्षेत्र और आदिवासी क्षेत्र भविष्य में भारत के विकास की नींव रखेंगे। जैसे-जैसे आजाद भारत की आयु बढ़ती जा रही है, देश में उस वर्ग का दायरा कम होता जा रहा है जिन्‍होंने गुलाम भारत में जन्‍म लिया, परवरिश ली अथवा वे स्‍वयं स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। हर साल हम इन बहुमूल्‍य लोगों को खोते जा रहे हैं जो हमारे देश के इतिहास की एक अमूल्‍य थाती हैं। मौजूदा पीढ़ी ने भले ही उस दौर के किस्‍से सुने हों लेकिन जिन लोगों ने वह दौर स्‍वयं जिया है, उनके एक एक शब्‍द आज हमारे लिए विराट संपदा है। भारत की स्‍वतंत्रता का क्षण इसके अनगिनत सेनानियों के समर्पण, संघर्ष एवं बलिदान की अजर-अमर-अमिट गाथा स्‍वयं में संजोए हुए है। यही कारण है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया तो सबसे पहले देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के ‘कोरोना योद्धाओं’ को भी श्रद्धांजलि दी और कहा कि स्वास्थ्य पेशेवरों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए भारतीय दल की भी सराहना की, देशवासियों से उनकी उपलब्धि की सराहना करने का आग्रह किया। अमृत महोत्‍सव के साथ ही इस साल से एक नई परिपाटी आरंभ की गई। देश के विभाजन के दौरान भारत के लोगों के दर्द और कष्टों का सम्मान करने के लिए प्रधानमंत्री ने 14 अगस्त को विभाजन भयावह स्मरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह बात सत्‍य है कि बीते समय में हमारा अखंड राष्‍ट्र एक नहीं दो बार विखंडित हुआ। अब तो यह तीन राष्‍ट्र राज्‍य के तौर पर वैश्विक परिदृश्‍य में शामिल हो चुका है लेकिन यह बात भी सत्‍य है कि भारत एवं भारतीयता का मूल विचार, अवधारणा हजारों वर्षों की संस्‍कृति, सभ्‍यता की श्रृंखला के बीच ही पल्‍लवित हुआ है। हमारी समावेशी संस्‍कृति ही हमारा पर्याय है, पहचान है। वेदों के मंत्र वर्तमान में भी जीवंत हैं। हमारा देश इतिहास एवं भूगोल तक ही सीमित नहीं है, यह एक जीवंत अस्तित्‍व की प्रगाढ़ अभिव्‍यक्ति है। यहां केवल विचार ही नहीं, वैचारिक संपदा के समानांतर अभ्‍यास भी समाहित है। इसी दृष्टि का गीता में भी उल्‍लेख है। यह दृष्टि सबको एक साथ, समान भाव से देखने का आग्रह करती है। इसी के चलते आज भारत ना केवल एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है बल्कि वह विश्‍व के उन्‍नत देशों की अग्र पंक्ति में भी जा खड़ा हुआ है।

बीते सात दशकों से हमारा देश कई चुनौतियों का सामना करते हुए लोकतांत्रिक मूल्‍यों पर खरा उतरा है। विपरीत हालातों का प्रतिकार भी भरपूर किया है। चूंकि यह देश बहुत विशाल है इसलिए इसमें व्‍याप्‍त समस्‍याएं भी विविध एवं व्‍यापक हैं। कई जटिल समस्‍याओं से जूझने के दौरान समय भी बदलता गया। ऐसे में हम अपनी त्रुटियों से सीख लेते हुए एवं सफलताओं से उत्‍साहित होकर एक प्रगतिशील राष्‍ट्र के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक कर हमने अपने दुश्मनों को एक नए भारत के उदय का संदेश दिया है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत कड़े फैसले ले सकता है। आज आजादी के 75 साल होने आए हैं और अनेक मोर्चों पर अभी बहुत से कार्य शेष हैं। आम जनता के जीवन स्‍तर का उन्‍नयन, बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य एवं शिक्षा की व्‍यवस्‍था, प्रशासनिक कसावट एवं पारदर्शिता, रोजगार की उपलब्‍धता, संसाधनों की पर्याप्‍त उपलब्‍धता, भोजन एवं आवास की सहज व्‍यवस्‍था, राजनीतिक सत्‍ता का विकेंद्रीकरण, नागरिक बोध में बढोतरी, आम एवं खास की कार्यक्षमता में वृद्धि एवं कार्यशैली में गुणवत्‍ता आदि ऐसे बिंदु हैं, जहां हम आज भी कमियां पाते हैं। इन्‍हें पूरा करना ही आज सबसे बड़ी चुनौती है। सामान्‍य जीवन की इन समस्‍याओं के बीच पूरे विश्‍व में व्‍याप्‍त कोरोना वायरस महामारी से निपटना आज बहुत बड़ी चुनौती है। इस महामारी के दो चरणों से गुजर चुके देश ने अब संभलना शुरू कर दिया है। कोविड टीकाकरण इसका श्रेष्‍ठ उदाहरण है। जिस तन्‍मयता एवं प्रतिबद्धता के साथ जनता ने टीकाकरण में सरकारी मशीनरी का सहयोग किया है, उससे इंगित होता है कि देश में का स्‍वास्‍थ्‍य-धन सुरक्षित एवं संरक्षित है। भारतीयों ने इस लड़ाई (COVID) को बहुत धैर्य के साथ लड़ा है। हमारे सामने कई चुनौतियां थीं लेकिन हमने हर क्षेत्र में असाधारण गति से काम किया। यह हमारे उद्योगपतियों और वैज्ञानिकों की ताकत का ही नतीजा है कि आज भारत को टीकों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। हम गर्व से कह सकते हैं कि आज भारत में सबसे बड़ा COVID19 टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अब तक 54 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की खुराक मिल चुकी है। वर्तमान दौर की सबसे सकारात्‍मक बात यह है कि आज वास्‍तव में स्‍वदेशी आंदोलन नए अर्थ पा रहा है। देश में बनी दोनों कोरोना वैक्‍सीन कोविशील्‍ड एवं कोवैक्‍सीन पर 50 करोड़ से अधिक आबादी विश्‍वास जताकर इसे ले चुकी है, इससे बड़ा प्रमाण और भला क्‍या होगा। बस, राष्‍ट्र की शुचिता इसी प्रकार बनी रहे। देश में प्रशासन हो या राजनीति, वहां महत्‍वपूर्ण पदों पर बैठे लोग आम जनता के प्रति ईमानदार, संवेदनशील हों एवं समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्‍यक्ति को भी एक सच्‍चे नागरिक होने का अहसास हो। उसे योजनाओं का लाभ मिले, अधिकार मिलें और बदले में वह अपने कर्तव्‍यों का पूरी गंभीरता से पालन करे। आजादी का अमृत महोत्‍सव हमें इन्‍हीं सारी बातों का आहवान करता है। आइये हम सब इस महायज्ञ में सहभागी बनें।

प्रधानमंत्री की मंशानुरूप अमृत महोत्‍सव के दौरान मिलने वाली सुविधाएं, चुनौतियां और दायित्‍व

– स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के 75 सप्ताह में 75 वंदे भारत ट्रेनें भारत के कोने-कोने से जुड़ेंगी।

– आने वाले दिनों में पीएम गति शक्ति योजना, 100 लाख करोड़ का राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा मास्टर प्लान लॉन्च होगा, जो समग्र बुनियादी ढांचे की नींव बनाएगा और हमारी अर्थव्यवस्था को एक एकीकृत मार्ग प्रदान करेगा।

– जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग का गठन किया गया है और भविष्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी चल रही है। एक ओर जहां लद्दाख आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण देख रहा है, वहीं दूसरी ओर सिंधु केंद्रीय विश्वविद्यालय लद्दाख को उच्च शिक्षा का केंद्र बनाएगा।

– भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ गया है और वर्ष 2030 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पर काम चल रहा है।

– प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन को देखते हुए राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की है। हमें भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का हब बनाना है।

– आज हम अपने गांवों को तेजी से बदलते हुए देखते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंची हैं। आज ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क गांवों को डेटा की शक्ति प्रदान कर रहा है, वहां इंटरनेट पहुंच रहा है। गांवों में भी डिजिटल उद्यमी तैयार हो रहे हैं।

– आने वाले वर्षों में हमें देश के छोटे किसानों की सामूहिक शक्ति को बढ़ाना होगा। हमें उन्हें नई सुविधाएं देनी होंगी। उन्हें देश का गौरव बनना चाहिए।

– हमें अगली पीढ़ी के बुनियादी ढांचे, विश्व स्तरीय निर्माण, अत्याधुनिक नवाचारों और नए जमाने की तकनीक के लिए मिलकर काम करना होगा।

– हमारा मंत्र है ‘छोटा किसान बने देश का शान’। यह हमारा सपना है। आने वाले वर्षों में हमें देश के छोटे किसानों की सामूहिक ताकत को और बढ़ाना है, हमें उन्हें नई सुविधाएं देनी होंगी।

देश के विकास को गति देगा 100 लाख करेाड़ रुपए का गति शक्ति मास्‍टर प्‍लान

75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 100 लाख करोड़ रुपये के समग्र बुनियादी ढांचे के विकास कार्यक्रम ‘गति शक्ति मास्टर प्लान’ की घोषणा की। राष्ट्र को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि यह योजना समग्र बुनियादी ढांचे के विकास और अर्थव्यवस्था के लिए एक एकीकृत मार्ग की नींव रखेगी। मोदी ने कहा, भारत को आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ बुनियादी ढांचे के निर्माण में एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। निकट भविष्य में, भारत प्रधान मंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय योजना के साथ आने और इसे लॉन्च करने जा रहा है।

गति शक्ति मास्टर प्लान पर एक नज़र

पीएम मोदी के अनुसार, ‘गति शक्ति मास्टर प्लान’ निकट भविष्य में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि ‘गति शक्ति’ एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान होगा जो देश में समग्र बुनियादी ढांचे की नींव रखेगा और अर्थव्यवस्था को एक एकीकृत और समग्र मार्ग प्रदान करेगा। ‘गति शक्ति मास्टर प्लान’ के माध्यम से, स्थानीय निर्माताओं की वैश्विक प्रोफ़ाइल को बढ़ावा दिया जाएगा और इससे उन्हें दुनिया भर में अपने प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि यह योजना भविष्य के नए आर्थिक क्षेत्रों की संभावनाएं पैदा करने में भी मदद करेगी। प्रधान मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि यह समय है कि भारत को विनिर्माण और निर्यात दोनों में वृद्धि करनी चाहिए। गति शक्ति हमारे स्थानीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करेगी। इससे भविष्य के नए आर्थिक क्षेत्रों के लिए संभावनाएं भी विकसित होंगी। विकास की राह पर चलते हुए, भारत को विनिर्माण और निर्यात दोनों को बढ़ाने की जरूरत है। हालाँकि, सरकार द्वारा योजना की लॉन्च तिथि की आधिकारिक घोषणा की जानी बाकी है। ‘गति शक्ति मास्टर प्लान’ के अलावा, पीएम मोदी ने रविवार को राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन शुरू करने और लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने की भी घोषणा की।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। प्रस्तुत विचार उनके निजी हैं।)

छवि स्रोत: https://gumlet.assettype.com/freepressjournal