Round Table Discussion on 'Reforms in Agriculture Sector through Modern Technology & Innovations' on Saturday 10th November 2018, at 5:00 PM, SPMRF Conference Room, 9, Ashoka Road, New Delhi- 110001

Salient Points of PM’s speech on the occasion of dedication of National Police Memorial to the Nation

साथियों, ये मेरा सौभाग्‍य है कि मुझे राष्‍ट्र सेवा और समर्पण के अमर गाथा के प्रति राष्‍ट्रीय पुलिस मेमोरियल को, देश को समर्पित करने का अवसर मिला है। इस मेमोरियल में बना central structure हर पुलिस के सामर्थ्‍य, शौर्य और सेवा का, भाव का प्रतीक है।

शिला के नीचे का जल प्रवाह हमारे समाज में निरंतर बहती सदभावना का प्रतीक है।

The Wall of Valour पर उन 34 हजार 844 पुलिस कर्मियों के नाम है। जिन्‍होंने देश के अलग-अलग राज्‍यों में, अलग-अलग चुनौतियों से निपटते हुए अपना सर्वोच्‍चय बलिदान दिया। मुझे विश्‍वास है कि इस मेमोरियल के नवनिर्मित्र म्‍यूजिम में रखी एक-एक वस्‍तु, एक-एक स्‍मृति यहां आने वाले हर देशवासी को, हमारे युवा साथियों को, हमारे देश के भविष्‍य, हमारे बच्‍चों को, अपनी पुलिस और Paramilitary व्‍यवस्‍था गौरवशाली इतिहास के बारे में प्रेरणा देगी। जिस प्रकार आप सभी अपने कर्तव्‍य के पथ पर दिन-रात, बिना रुके, बिना थूके अटल रहते हैं। हर मौसम में, गर्मी में, सर्दी में, बारिश में, बर्फ में हर समय, हर त्‍यौहार पर सेवा के लिए तैनात रहते हैं। कुछ यही भावना इस मेमोरियल को देखने भर से ही अपने भीतर झलकती है।

साथियों, आज का दिन जम्‍मू-कश्‍मीर में शांति और व्‍यवस्‍था कायम करने के लिए आतंक से निपटने वाले हर जवान को याद करने का भी है। देश के नक्‍सल प्रभावित जिलों में जो जवान अभी ड्यूटी पर तैनात है। उनसे भी अभी हमें यही कहूंगा कि आप बेहतरीन काम कर रहें है। और शांति स्‍थापना की दिशा में आप तेजी से आगे बढ़ रहे है।

अगर आज नक्‍सल प्रभावित जिलों की संख्‍या कम हो रही है। उन इलाकों के ज्‍यादा नौजवान मुख्‍यधारा से जुड़ रहे हैं। तो इसमें आपके प्रयासों की भी बहुत बड़ी भूमिका है। North East में डटे हमारे साथियों का शौर्य और बलिदान भी अब शांति के रूप में हम अनुभव कर रहे हैं। शांति और समृद्धि का प्रतीक बन रहे हमारे उत्‍तर पूर्व के विकास में आपका भी योगदान है।

साथियों, आज का ये दिन देश में आपदा प्रबंधन में जुटे किसी प्राकृतिक संकट के समय या हादसे के समय राहत के काम में जुटने वाले उन जवानों को भी याद करने का है जिनकी सेवा की बहुत चर्चा नहीं की जाती है।

मैं आज देशवासियों को ये कहना चाहता हूं… पिछले कुछ वर्षों से कहीं पर भी प्राकृतिक आपदा होती है तो आपने देखा होगा एनडीआरएफ लिखे हुए या एसडीआरएफ लिखे हुए जवानों को यूनिफार्म में रात-दिन वहां कड़ी मेहनत करके लोगों की जान बचाते हुए आपने देखा होगा। लेकिन देश को पता नहीं है ये वही खाकी वर्दी वाले मेरे पुलिस के जवान हैं। देश….. उनके साहस को, उनके समर्पण को, उनकी सेवा को कभी न भूले। बहुतो को ये पता तक नहीं होता कि कोई इमारत गिरने पर, नाव हादसा होने पर, आग लगने पर, रेल के अंदर हादसे होने पर, राहत के काम की कमांड संभालने वाले लोग कौन हैं।

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