Special Address by Shri Amit Shah, Union Home Minister & National President, BJP on "Abolition of Triple Talaq: correcting a historic wrong" on Sunday, 18th August 2019 at 5.30 pm, Mavlankar Hall, Constitution Club of India, Rafi Marg, New Delhi

Salient Points of PM’s address in Majlis, the Parliament of Maldives

मालदीव की मजलिस के सम्माननीय अध्यक्ष,
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मेरे मित्र मोहम्मद नशीद जी,
मजलिस के सम्माननीय सदस्य गण,

Excellencies,

आमंत्रित माननीय अतिथि गण,

नमस्कार।

आप सबको मैं अपनी और 130 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएँ देता हूँ। ईद-उल-फितर के पावन पर्व का आनंद और उत्साह अभी भी हमारे साथ हैं। आप सबको और मालदीव के सभी लोगों को मैं इस उपलक्ष्य पर बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

अध्यक्ष महोदय,

मालदीव – यानि हज़ार से अधिक द्वीपों की माला – हिन्द महासागर का ही नहीं, पूरी दुनिया का एक नायाब नगीना है। इसकी असीम सुंदरता और प्राकृतिक संपदा हजारों साल से आकर्षण का केंद्र रही हैं। प्रकृति की ताकत के सामने मानव के अदम्य साहस का यह देश एक अनूठा उदाहरण है। व्यापार, लोगों और संस्कृति के अनवरत प्रवाह का मालदीव साक्षी रहा है। और यह राजधानी माले, विशाल नीले समंदर का प्रवेश-द्वार ही नहीं है। स्थायी, शांतिपूर्ण और समृद्धशाली हिंद महासागर क्षेत्र की यह कुंजी भी है।

अध्यक्ष महोदय,

आज मालदीव में, और इस मजलिस में, आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत हर्ष हो रहा है। मजलिस ने सर्वसम्मति से मुझे निमंत्रण देने का निर्णय, सम्माननीय नशीद जी के स्पीकर बनने के बाद अपनी पहली ही बैठक में लिया। आपके इस gesture ने हर भारतीय के दिल को छू लिया है। और उनका सम्मान और गौरव बढ़ाया है। इसके लिए, अध्यक्ष महोदय, मैं आपको, और इस गरिमामय सदन के सभी सम्माननीय सदस्यों को अपनी ओर से, और समूचे भारत की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।

अध्यक्ष महोदय,

आज मैं दूसरी बार मालदीव आया हूँ। और एक प्रकार से, दूसरी बार मजलिस की ऐतिहासिक कार्यवाही का साक्षी हूँ। पिछले वर्ष मैं बहुत खुशी और गर्व के साथ राष्ट्रपति सोलिह के पद-ग्रहण समारोह में शामिल हुआ था । लोकतन्त्र की जीत का वह उत्सव खुले स्टेडियम में आयोजित किया गया था। चारों ओर, हजारों उत्साहित लोग मौजूद थे। उन्हीं की शक्ति और विश्वास, साहस और संकल्प उस जीत का आधार थे। उस दिन मालदीव में लोकतन्त्र की ऊर्जा को महसूस कर मुझे एक रोमांच सा अनुभव हो रहा है । उस दिन मैंने मालदीव में लोकतन्त्र के प्रति आम नागरिक के समर्पण को और, अध्यक्ष महोदय, आप जैसे नेताओं के प्रति उनके प्यार और आदर को भी देखा। और आज, इस सम्माननीय सदन में, मैं लोकतन्त्र के आप सब पुरोधाओं को हाथ जोड़ कर नमन करता हूँ।

अध्यक्ष महोदय,

यह सदन, यह मजलिस, ईंट-पत्थर से बनी सिर्फ एक इमारत नहीं है। यह लोगों का महज़ मजमा नहीं है। यह लोकतन्त्र की वो ऊर्जा भूमि है जहां देश की धड़कने आपके विचारों और आवाज़ में गूँजती हैं। यहां आप के माध्यम से लोगों के सपने और आशायेँ सच में बदलते हैं।

यहाँ अलग-अलग विचारधारा और दलों के सदस्य देश में लोकतन्त्र, विकास और शांति के लिए सामूहिक संकल्प को सिद्धि में बदलते हैं। ठीक उसी तरह, जैसे कुछ महीने पहले मालदीव के लोगों ने एकजुट हो कर दुनिया के सामने लोकतंत्र की एक मिसाल कायम की। आपकी वो यात्रा चुनौतियों से भरी थी।

लेकिन मालदीव ने दिखाया, आपने दिखा दिया, कि जीत अंतत: जनता की ही होती है। यह कोई मामूली सफलता नहीं थी। आपकी यह कामयाबी दुनिया भर के लिए एक मिसाल और प्रेरणा है। और मालदीव की इस सफलता पर सबसे अधिक गर्व और खुशी किसे हो सकती थी? उत्तर स्वाभाविक है। आपके सबसे घनिष्ठ मित्र, आपके सबसे नजदीकी पड़ौसी और दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र – भारत को। आज आपके बीच मैं ज़ोर देकर कहना चाहता हूँ कि मालदीव में लोकतन्त्र की मजबूती के लिए भारत और हर भारतीय आपके साथ था और साथ रहेगा।

अध्यक्ष महोदय,

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