Special Address by HE Edgars Rinkevics, Foreign Minister of Republic of Latvia on "India - Latvia Relations in a Changing World" on Tuesday, 14th January 2020 at 11 AM, Board Room, Constitution Club of India, Rafi Marg, New Delhi

Salient Points of PM’s address at the inauguration of various Healthcare projects at AIIMS & Safdarjung Hospitals on 29 June, 2018


Friends, AIIMS पर बढ़ते दबाव को देखते हुए दिल्‍ली में इसके सभी केंपसों की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। आज तीन सौ करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाले National Centre for Ageing का भी शिलान्‍यास हुआ है। ये सेंटर 200 बेडस का होगा।

आने वाले डेढ़ दो वर्षों में इसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। यहां वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए तमाम सुविधाएं होंगी। इसमें वृद्धावस्‍था, विज्ञान अनुसंधान केंद्र भी होगा, जहां वृद्धावस्‍था से जुड़ी समस्‍याओं को लेकर रिसर्च की जा सकेगी।

इसके अलावा सफदरजंग अस्‍पताल में भी 13 सौ करोड़ से अधिक राशि खर्च करके अस्‍पताल में सुविधाओं को और आधुनिक बनाने का काम हुआ है। इसी के तहत यहां एक एमरजेंसी ब्‍लॉक पर एक सुपर स्‍पेशिलिटी ब्‍लॉक की सेवाओं को देश को समर्पित किया गया है। सिर्फ मेडिकल एमरजेंसी के लिए 500 बेडस की नई क्षमता के साथ सफदरजंग अस्‍पताल देश का सबसे बड़ा एमरजेंसी केयर अस्‍पताल बन जाएगा।

साथियों, आज जिन पांच प्रोजेक्‍टस का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया गया है। उसमें से एक पावर ग्रिड विश्राम सदन भी है। सार्वजनिक उपक्रमों और समाज के प्रति उनकी जिम्‍मेदारी का ये एक उत्‍तम उदाहरण है। इससे न सिर्फ मरीजों को बल्कि उनकी देखरेख करने वालों को भी बहुत बड़ी राहत मिल रही है।

साथियों, समय पर सही इलाज, जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन दिल्‍ली का ट्रैफिक कई बार इसमें बाधक बन जाता है। विशेष तौर पर एम्‍स के अलग-अलग सेंटर और केंपस के बीच मरीजों और डॉक्‍टरों की आवाजाही को लेकर पहले बहुत बड़ी समस्‍या थी। एम्‍स की मुख्‍य बिल्‍डिंग और जय प्रकाश नारायाण ट्रामा सेंटर के बीच ये समस्‍याएं भी अब सुलझ गई है। लगभग एक किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग का भी अभी थोड़ी देर पहले लोकार्पण करने का अवसर मिला। इस टनल से मरीजों, उनके रिश्‍तेदारों, डॉक्‍टरों और जरूरी दवाइयों यंत्रों को बिना रूकावट आवाजाही सुनिश्चित हुई है।

साथियों, भारत जैसे हमारे विशाल, विकासशील देश के लिए सस्‍ती, सुलभ, सुरक्षित और आधुनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं जुटाना कितनी बड़ी जिम्‍मेवारी है इससे आप भली-भांति परिचित हैं। बीते चार वर्षों में Public Health Care को लेकर देश को एक नई दिशा दी गई है। केंद्र सरकार के एक के बाद एक Policy Intervention से हम उस स्थिति की तरफ बढ़ रहे हैं जहां देश के गरीब और मध्‍यम वर्ग को बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए भटकना न पड़े, अनावश्‍यक खर्च न करना पड़े।

राज्‍य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र सरकार देश भर में स्‍वास्‍थ्‍य सेवा से जुड़ा आधुनिक Infrastructure खड़ा कर रही है। ये सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। कि आज देश में अस्‍पतालों में बच्‍चों को जन्‍म देने का प्रचलन Institutional Delivery, उसका प्रचलन बड़ा है। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्‍वास्‍थ्‍य की निरन्‍तर जांच, टीकाकरण में पांच नई वेक्सिन जुड़ने से मातृ और शिशु मृत्‍य दर में अभूतपूर्वक कमी आई है। इन प्रयासों को अंर्तराष्‍ट्रीय एजेंसीज ने भी सराहा है।

साथियों, सरकार का प्रयास है कि बड़े शहरों के आस-पास जो स्‍वास्‍थ्‍य का Infrastructure तैयार किया गया है, उसको सुदृढ़ करने के साथ-साथ ऐसी ही सुविधाएं टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंचाई जाए। इसके लिए सरकार दो व्‍यापक स्‍तर पर काम कर रही है। एक तो जो हमारे मौजूदा अस्‍पताल हैं उनको और अधिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। और दूसरा, देश के दूर-दराज वाले इलाकों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को पहुंचाया जा रहा है।

साथियों, आजादी के 70 वर्षों में जितने एम्‍स स्‍वीकृत हुए या बनाए गए हैं उससे अधिक बीते चार वर्षों में मंजूर किए गए हैं। देश में 13 नए एम्‍स की घोषणा की गई है जिसमें से आठ पर काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा देश भर में 15 मेडिकल कॉलेज में सुपर स्‍पेशिलिटी अस्‍पतालों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

देश के लगभग हर जिले में डायलिसिस सेंटर बनाए जा रहे हैं। यहां गरीबों को निशुल्क डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है।

अब तक लगभग 2.5 लाख मरीज़ इसका लाभ उठा चुके हैं।

पहले जहां गरीब को मुफ्त डायलिसिस के लिए 100-200 km जाना पड़ता था, अब उसे अपने ही जिले में ये सुविधा मिल रही है

स्वस्थ परिवार से ही स्वस्थ समाज और स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है।

आप पर देश को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी है।

इसलिए राष्ट्रपति जी भी आपको राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण प्रहरी कहते हैं

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