Round Table Discussion on "Prime Minister's visit to Indonesia: an Overview" by Prof. Baladas Ghoshal (Secretary General, Society for Indian Ocean Studies) on 12 July 2018 at 5.30 PM, SPMRF Conference Room, 9, Ashoka Road, New Delhi

जीएसटी से जरूरी सामान सस्ते हुए हैं

हर्षवर्धन त्रिपाठी

जीएसटी को लेकर सबसे बड़ा खतरा यही बताया जा रहा था कि इससे महंगाई बढ़ेगी। इस महंगाई के बढ़ने की डर दिखाकर उन कारोबारियों ने भी जमकर प्री जीएसटी सेल लगा रखी थी, जो जीएसटी को कारोबारियों के लिए मुश्किल बताकर इसके विरोध में सांकेतिक दुकान भी बन्द कर चुके थे। कार कम्पनियों ने भी ग्राहकों को डराकर प्री जीएसटी सेल में काफी गाड़ियां बेच लीं। लेकिन, अब समझ में आ रहा है कि प्री जीएसटी सेल में खरीद करने वाले ज्यादातर लोग घाटे में रहे होंगे। क्योंकि, ज्यादातर जरूरी सामान जीएसटी के बाद सस्ते हो गए हैं। फोन और कार भी आज के मध्यवर्ग के लिए जरूरी सामानों में ही आता है। इसके अलावा भी जरूरी सामान कैसे सस्ते हुए हैं, इसका अन्दाजा 30 जून की रात 12 बजे से शुरू हुई बिग बाजार जीएसटी सेल से ही पता चल गया। इलाहाबाद जैसे देर शाम उनींदे हो जाने वाले शहर से सारी रात जागने वाली मुम्बई तक में लोग बिग बाजार की जीएसटी सेल में कतार में लगे थे। 1 जुलाई की सुबह वही कार कम्पनियां जो एक दिन पहले तक जीएसटी का डर दिखाकर कारें बेच लेना चाह रही थीं, अब बता रही थीं कि जीएसटी के बाद उनकी कम्पनी की कार कितनी सस्ती हुई है। आईफोन भी सस्ता हो गया।

एक भ्रम ये भी था कि ज्यादा महंगी कारों को जीएसटी सस्ता करेगा लेकिन, छोटी और मध्यवर्ग की पहुंच वाली कारें सस्ती नहीं होंगी। ये भ्रम भी टूटा है। हाइब्रिड कारों को छोड़कर सभी कारें सस्ती हुई हैं। हाइब्रिड कार खरीदने वाले जीएसटी के बाद घाटे में हैं। उदाहरण के लिए टोयोटा की हाइब्रिड कैमरी की जीएसटी के पहले दिल्ली में कीमत 31.98 लाख थी जो, जीएसटी के बाद करीब 17 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। अब ये कार दिल्ली में 37.23 लाख की मिलेगी। लेकिन, हाइब्रिड कार खरीदने वाले देश में बहुत कम लोग हैं। टोयोटटा कम्पनी की ही एसयूवी फॉर्च्यूनर करीब 9 प्रतिशत सस्ती हो गई है। दिल्ली में जो टोयोटा फॉर्च्यूनर 31.86 लाख की थी, अब वही गाड़ी 29.18 लाख में ही मिल जाएगी। इस उदाहरण से ये भ्रम भी हो सकता है कि सिर्फ बड़ी गाड़ियां ही सस्ती हुई हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है। मारुति की डिजायर कार करीब 2000 रुपये सस्ती हुई है और मारुति की छोटी कार ऑल्टो भी 1000 रुपये सस्ती हुई है। मारुति की कारें अधिकतम 3 प्रतिशत तक सस्ती हुई हैं। ह्युंदई और निसान ने भी अपना कारों की कीमत घटा दी है। फोर्ड ने करीब 4.5 प्रतिशत दाम घटाए हैं और रेनो ने तो 7 प्रतिशत तक अपनी गाड़ियां सस्ती कर दी है। होन्डा की भी कारें सस्ती हो गई है। कुल मिलाकर पूरे ऑटो सेक्टर के लिए और कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए जीएसटी खुशखबरी लेकर आया है।

फोन खरीदने वालों के लिए भी जीएसटी अच्छी खबर लेकर आया है। आईफोन खरीदने वालों के लिए बेहद अच्छी खबर है। क्योंकि, एप्पल ने आईफोन के साथ अपने लैपटॉप और टैब की कीमत भी काफी कम कर दी है। दूसरी मोबाइल कम्पनियों ने भी 5-10 प्रतिशत तक की कटौती की है।

रियल एस्टेट को अभी इससे बाहर रखा गया है। हालांकि, बहुत से बिल्डर जीएसटी के नाम पर ग्राहकों से ज्यादा वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि, इस मामले में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से ज्यादा रकम वसूलने वाले बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अभी जो घर बन रहे हैं, उसमें ज्यादा टैक्स लगेगा। क्योंकि, जीएसटी लागू होने के बाद करीब 1 प्रतिशत टैक्स बढ़ गया है। लेकिन, बिल्डर इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल कर सकते हैं। कुल मिलाकर जीएसटी लागू होने के बाद बिल्डर के घर बनाने की लागत कम होगी। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बिल्डर इनपुट टैक्स क्रेडिट से मिला फायदा ग्राहक को देते हैं या नहीं।

घर, गाड़ी फोन की कीमतों पर जीएसटी के बाद क्या असर पड़ रहा है, ये समझ में आया। लेकिन, सबसे जरूरी ये समझना है कि रोजाना की जरूरतों का सामान सस्ता हो रहा है या महंगा। इसका जवाब खोजने के लिए 2 जरूरी तथ्य हैं। पहला राजस्व सचिव हंसमुख अधिया के मुताबिक, 81 प्रतिशत सामान पर 18 प्रतिशत या उससे कम टैक्स लगेगा। अभी तक ऐसे ज्यादातर सामानों पर 19 प्रतिशत से ज्यादा टैक्स लगता था। दूसरा सब्जी, दूध, अंडा, आटा और ऐसे 149 श्रेणी के सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। 149 श्रेणी में आने वाले सारे सामानों को जीएसटी में शून्य कर के दायरे में रखा गया है। फल, सब्जी, अनाजसब इसी श्रेणी में आते हैं। इससे किचन के बजट पर बुरा असर पड़ने वाली आशंका लगभग खत्म हो गई है। चाय की पत्ती, खाने का तेल, कपड़ा और बच्चों के उपयोग के सामान पर 5 प्रतिशत टैक्स रखा गया है। घी, मक्खन, बादाम और फ्रूट जूस पर जीएसटी में 12 प्रतिशत कर लगेगा। जबकि, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, साबुन, आइसक्रीम और प्रिन्टर पर 18 प्रतिशत कर लग रहा है।

जीएसटी को लेकर व्यापारियों की तरफ से विरोध की खबरें आ रही हैं। लेकिन, जीएसटी को लेकर सरकार जिस तरह से तैयार दिख रही है और जितनी पारदर्शिता से सभी सामानों पर लगने वाले जीएसटी के बारे में हर किसी को बता दिया जा रहा है, ऐसा भारत में पहले कभी नहीं हुआ। हां, इतना जरूर है कि भारत में व्यापारियों को अब हर खरीद-बिक्री को पारदर्शी रखना होगा। उस पर कर चुकाना होगा। लम्बे समय से भारत के व्यापारियों को इस तरह से पारदर्शी तरीके से काम करने की आदत नहीं रही है और इसीलिए व्यापारी पहली नजर में इसका विरोध करते दिखते हैं। कुछ जानकार इसे भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत आधार मतदाता वर्ग यानी व्यापारी के नाराज होने के तौर पर भी देख रहे हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जितने भी फैसले लिए हैं, वो पहली नजर में लोगों के खिलाफ दिखते हैं। लेकिन, ज्यादातर मामलों में अन्त में लोगों की बेहतरी ही हुई है। और मैं निजी तौर पर मानता हूं कि जीएसटी के मामले में भी ऐसा ही होगा। क्योंकि, जब व्यापारी पर कर चुराकर मुनाफा बढ़ाने के बजाय कर चुकाकर मुनाफा बढ़ाने का आसान रास्ता होगा, तो वो भला कठिन और अपमानजनक रास्ता क्यों चुनेगा। कुल मिलाकर जीएसटीआजाद भारत का सबसे बड़ा सुधार साबित होने जा रहा है। और इसके परिणाम भी सभी के लिए बेहतर होंगे। ग्राहक, व्यापारी, टैक्स विभाग से लेकर देश की अर्थव्यवस्था के लिए जीएसटी अच्छे दिन लाने वाला दिख रहा है। हर बार प्रधानमंत्री के फैसलों को लेकर विपक्षी इस भरोसे में रहते हैं कि इससे जनता मोदी के खिलाफ होगी लेकिन, हर बार मोदी अपने फैसलों से जनता का भरोसा और ज्यादा जीत लेते हैं। जीएसटी भी ऐसा ही एक फैसला साबित होता दिख रहा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी रिसर्च फाउंडेशन में सीनियर फेलो  हैं। ये उनके निजी वि चार हैं।)

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